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गांधी अम्बेडकर की समाधि

                
                                                         
                            गांधी अम्बेडकर की समाधि है रोती
                                                                 
                            

भंवर में फंसी है गरीबो की नईया

कैसे जलेगी यहां शांति ज्योति

गाँधी अम्बेडकर की समाधि है रोती



जंग हो रही है, अश्रु बह रहे हैं

बिलख कर के हमसे ये कह रहे हैं

सहज ही नहीं है सीपो का मोती

गाँधी अम्बेडकर की समाधि है रोती



भाव मर गया है प्रेम खो गया है

कौन ये रगों में बारूद बो गया है

लहू बन गया है गंगा का पानी

याद कर लो फिर से गाँधी अम्बेडकर की जुबानी

©Rohit Yadav


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7 वर्ष पहले

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