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छोड़ कर तुम चले गए

                
                                                         
                            मिलने की चाह रखती है दिल,पर मुलाकात नही होती।
                                                                 
                            
जब से छोड़ गए हो हमे,हमारे लिए दिन -रात नही होती।
भय सा लगता है, अंधेरी रातो में हमे।
नीद नही आती है, तेरे यादो में हमे।
जहाँ भी जाते हैं, सुकून नही मिलता है दिल को हमे।
हर महफ़िल में,तुम्हारी याद आती है हमे।
रातो के गर्दिश में,ख्वाब नही आता है हमे।
फूलो की फुलवारी में,महक नही आता है हमे।
नीरस सी जिंदगी,अब सताता है हमे।
इन लबो पे अब मुस्कुराहट ,भी नही आता है हमे।
ये जीवन का सफर,अधूरा लगता है हमे।
साथी बन कर क्यो?छोड़ गया हमे।
दिल मे रह कर,क्यो ?दिल छोड़ गया हमारे।
आँखो में बसने वाली,तू एक मोहोब्बत था हमारे।
अब जिये तो कैसे जिये,किसके सहारे।
ना साथ रही,ना मिला किनारा हमे।
भटकते राहो में,अकेला छोड़ गया हमे।
जीवन सफर मे, साथ नही दिया तुमने।
क्या?कुसूर था, की छोड़ कर चले गए हमे।
छोड़ कर,यादे और स्मृति दे गया हमे।
हमने सोचा ही नही था कि,ये दिन भी आएगा।
सुकून भरे पल,इतना जल्दी निकल जायेगा।
सावन की फुहार, हमे छोड़ चला जयेगा।
बसन्त की बहार, हमे छोड़ कर चला जयेगा।
हरियाली और सावन भी,हमे छोड़ कर चला जयेगा।
कभी सोचा ही नही था,हमारे जीवन मे ये दिन भी आएगा।
सुना सा लगता है साथी,ये घर और गलियारे।
जहां कभी चलता था,लेरे लब्जो से प्यार भरे गाने।
दिल से दिल बाते करते,कभी थकते नही थे।
ओठो में सदा ही ,सुंदर मस्कान रहते थे।
तेरे चेहरे में सदा ही,निखार रहते थे।
तेरे हर बातों में,प्यार ही प्यार रहते थे।
तेरे एक हसी में ,सारा जहान रहते थे।
तेरे ओठो में सदा,प्यार का मस्कान रहते थे।
हरियाली और सावन,सदा ही तेरे साथ रहते थे।
घर और आंगन ,तेरे खुसबू से महकते थे।
मेघा भी,तेरे बालो की,घटा से बरसते थे।
फूल भी तेरे मुस्कान, से खिलते थे।
सरोवर का कवँल भी,तेरे खुसबू से महकते थे।
चाँद भी तेरे ,बिदिया से चमकते थे।
सूरज भी तेरा,चेहरा देख कर निकलते थे।
रात भी तेरे आगोस में,पलते थे।
कितना मधुर था,ओ दिन पास-पास रहते थे।
एक दूसरे के,साथ-साथ रहते थे।
कितना अच्छा था,ओ दिन प्यार ही प्यार बरसते थे।
कितना सुकून था जीवन मे,साथ-साथ चलते थे।
कितना प्यारा था ओ दिन,एक दूसरे के दिल मे रहते थे।
कितना न्यारा था ओ मंजर,जीवन साथ रहते थे।
जहाँ फूलो की महक,तेरे दिल मे बसते थे।
गुलदस्ता बन कर,सारा दिन महकते थे।
प्यार भरी आँखों से,देखा करते थे।
मनो लगता था,जीवन का हर सपना तुम्ही थे।
तुम्ही में तो हमारा,जीवन सांस बसते थे।
तुम्ही को तो अपना,प्राण समझते थे।
तुम्ही को तो अपना,जीवन आधार समझते थे।
तुम्ही को अपना ,जीवन संसार समझते थे।
तुम्हे ही को अपना,सच्चा प्यार समझते थे।
क्या?हुवा की,मेरे चाहत को छोड़ कर चले गए।
मेरे दिल को वीराना ,छोड़ कर चले गए।
इस दुनिया की भीड़ में,अकेला छोड़ कर चले गए।
इन आँखो में ,आँसू भर कर क्यो?चले गए।
मेरे दिल मे रह कर,दिल छोड़ कर क्यो?चले गए।
जीवन भर के लिए,यादे और स्मृति दे कर चले गए।
इस दुनिया मे मुझे,अकेला छोड़ कर चले गए।
मुझे क्यो?छोड़ कर तुम,चले गए।
साथी की तरह रह कर,साथ छोड़ कर चले गए।
मुझे क्यो?छोड़ कर तुम, चले गए।
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1 hour ago

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