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मेरे तो राम सब कुछ हैं

                
                                                         
                            ये जीवन कर्म की नईया, वही अंजाम सब कुछ हैं,
                                                                 
                            
मेरे तो राम सब कुछ हैं, उन्ही के नाम सब कुछ है।

हे लाखों गुण के स्वामी, मुझमें गुण प्रेम का भर दो,
जपे जो राम ही केवल, मधुर ऐसी अधर दो,
चरण के धूल से चंदन लगा मैं सूर्य बन जाऊं,
मेरा भय क्या बिगाड़ेगा तुम्हारे शौर्य जब गाऊं,

तुम्हीं हो रौशनी केवल, जहां में शाम सब कुछ है,
मेरे तो राम सब कुछ हैं, उन्हीं के नाम सब कुछ है।

जटायू को दिए पितृ का दर्जा, हम बालक बनने आएं,
पालक तुम्हीं सबसे बड़े, कर्तव्य जो अपना निभाए,
छवि दिल में बने तुम्हारी, भक्ति आठों याम लिख दो,
नहीं किस्मत में कुछ ज्यादा, मुझे बस राम लिख दो,

नहीं मेरा जो अब तक था, तुम्हारा धाम सब कुछ है,
मेरे तो राम सब कुछ हैं, उन्हीं के नाम सब कुछ है।

ये जीवन कर्म की नईया, वही अंजाम सब कुछ हैं,
मेरे तो राम सब कुछ हैं, उन्हीं के नाम सब कुछ है।
– ऋषभ भट्ट
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
11 महीने पहले

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