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चाय बस एक कप है

                
                                                         
                            उमर कट जाएगी करते तारीफें तुम्हारी,
                                                                 
                            
चाय बस एक कप है और बातें ढेर सारी,

धड़कनें भी तेज देखो बिन इजाज़त चल रही हैं,
लगी हों ड्यूटियां उनकी यूं शामें ढल रही हैं,
पल ये थम जाए या तो वक्त कुछ और दे दे,
ऐ ख़ुदा तूं चाहतों को मेरे इक दौर दे दे,

हसरतें कुछ आज कर ली, हूर रख लो तुम सारी,
उमर भर साथ वो हो बस, लिखो किस्मत हमारी,

चाय बस एक कप है और बातें ढेर सारी।

है सुना जब बन रही थी कल तकल दुनिया अनोखी,
निग़ाहों सी तुम्हारी हूबहू फिरदौस देखी,
नज़र लग जाए न तुमको जहन में एक बात भर लो,
पलक की छांव में जरा सी रात भर लो,

दबी आवाज़ है लब पे, दिलों में चीखती दिल निसारी,
सौ जनम की दौलतें हैं, एक तरफ तुम संग पल गुजारी,

चाय बस एक कप है और बातें ढेर सारी।
– ऋषभ भट्ट
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
4 महीने पहले

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