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आशनाई

                
                                                         
                            तेरी पैरों को छूके मिट्टी पाक लाई है,
                                                                 
                            
दिल–ए–आशुफ़्त की तूं आशनाई है,

बाआबे–ताब मुझमें अहलियत तेरी खिली,
फिज़ा में रंग फैले, धूप की रानाई है,

मेरी पहचान तेरी होंठो के जरीदा निगार,
मेरी जिन्दगी अंजुम–ए–शौदाई है,

तवज्जोह से देखता हूँ तुम परास को,
तहज़ीब से छूती तुम्हें परछाईं है,

तेरे ही वास्ते होंठ मेरे खिले हैं,
तेरे ही वास्ते गीत मैंने गाई है,

बेकमो–कास्त बताया है हर सफे में,
इत्मीनान की मेरे तूं पारसाई है,

तेरी पैरों को छूके मिट्टी पाक लाई है,
दिल–ए–आशुफ़्त की तूं रोशनाई है।
– ऋषभ भट्ट
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7 महीने पहले

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