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मेरी चाहत

                
                                                         
                            न मैं कोई देवी हूँ
                                                                 
                            
न कोई मूरत हूँ
मैं तो हूँ बस एक लड़की
और जीना चाहती हूँ ।

तुमने जो मापदंड बनाए हैं
जो परिभाषाये जो व्याख्यान किए हैं
उनमें मैं फिट नहीं होती
बस तुम्हें इतना बतलाती हूँ ।

अपने विचारों से मुझे दूर रखो
न कोई गहना न कोई चीज़ समझो
इस पुरुषों के दंगल में अपनी
एक पहचान बनाना चाहती हूँ ।

मुझे घर की चोखट से निकलना है
जहाँ तुम जाते हो वहाँ जाना है
कहते हो वर्क लोड बहुत है
मैं भी तुम्हारा हाथ बटाना चाहती हूँ ।

सुना है वेस्टर्न कल्चर पैर पसार रहा है
सुना है ज़माना तेजी से बदल रहा है
बरसों से लगा हाउसवाइफ का टैग
मैं भी अब बदलना चाहती हूँ ।

न मैं कोई द्रोही हूँ
न कोई अबला हूँ
मैं तो हूँ बस एक लड़की
और जीना चाहती हूँ ।

रावसाहब


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6 वर्ष पहले

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