सुख में तो सब
मिलते हैं
पर जो दुख में
साथ निभाता है
वो सच्चा यार कहलाता हैं।
जब होती है
मुझको दिक्कत
तो दौड़ा चला आता है
वो सच्चा यार कहलाता हैं।
कंधे पर है
हाथ रक्कर
कन्धा भले ही दुखता है
वो सच्चा यार कहलाता हैं।
जिंदगी है ये
दुनिया मेरी
तो इसको रोशन करने
वाले संसाधन मेरे यार है।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X