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शर्म से आंखें नीची होंगी

                
                                                         
                            बेवजहों के पल जब तुमसे कुछ पूछेंगे क्या बोलोगे।
                                                                 
                            
शर्म से आंखें नीची होंगी या फिर डर कर बैठोगे।
अधरों पर दुबकी सी बोली या फिर मुंह भी खोलोगे।
या फिर जाकर कहीं अकेले चुपके से रोलोगे।
मन के भावों में बहते हो, संघर्षों से डरते हो।
नही आग में तपते हो तुम जलते हो बस जलते हो ।
जब तुम्हें न कोई राह दिखेगी तो जीवन भर पछताओगे।
शर्म से आंखें नीची होंगी या फिर डर कर बैठोगे।
कोई मंजिल बात करे न ऐसी बातें छेड़ोगे।
होंठों पर बस हंसी रहेगी पर अंदर से रोओगे।
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12 घंटे पहले

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