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देख के गीली हो गई आंख..

                
                                                         
                            रफ्ता रफ्ता दिन है गुजरे
                                                                 
                            
रफ्ता रफ्ता गुजरी रात........
रफ्ता रफ्ता सांसे भरली
रफ्ता रफ्ता हो गई बात.........

क्या सावन की हरियाली
क्या कानों की बाली ।
सब ही सुंदर आज दिखे
खुशी बाग का माली।
चली देखने नदी नाव को
और निहारी बाट ..........
रफ्ता रफ्ता सांसे भरली
रफ्ता रफ्ता हो गई बात ....

मुझ में तेरा सब मैं देखूं
तू देखे तो मैं देखूं।
जीवन का श्रृंगार तुम्ही से
जीवन भर तुझको मैं देखूं।
हमरे खातिर खुद दुख देखे
देख के गीली हो गई आंख.....
रफ्ता रफ्ता सांस भरली
रफ्ता रफ्ता हो गई बात......
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6 घंटे पहले

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