सबकुछ पाना ही जीत नहीं हैं,
सबकुछ खोना परपीड़ नहीं हैं।
अब यही सोच आगे बढ़ना है।
बाधाओं से लड़ना है।
सागर-सा ऊर्मि पाना है ,
हिमाचल - सा ऊंचाई ,
नदियों-सा आदर पाना है ,
असफलताओं की कहानी,
खो-कर भी कुछ पाना है।
हार कर भी अब रूकना नहीं हैं,
जीवन झुका दे पर झुकना नहीं हैं।
यही अंतिम संकल्प है, मेरा,
ज़िंदगी में कुछ करना हैं,
बाधाओं से लड़ना हैं।
- रिकेश कुमार पंडित ‘तंदुलकर’
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