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मौसम बदल जाए तो मैं क्या करूँ ?

                
                                                         
                            मौसम बदल जाए तो मैं क्या करूँ,
                                                                 
                            
क्या मैं भी बदल जाऊं, या फिर यूं ही रहूँ?

गर्मी में पसीने से तर-बतर,
सर्दी में रजाई में लिपटकर।

बरसात में छाता लेकर चलूँ,
या फिर भीगकर मस्ती में झूमूँ?

पतझड़ में पत्तों के संग उड़ जाऊं,
या फिर बस यूं ही खड़ा रह जाऊं?

मौसम बदलता है, ये उसकी फितरत है,
पर मैं क्यों बदलूं, ये मेरी हसरत है।

मौसम चाहे जो भी रंग दिखाए,
मैं तो अपनी मस्ती में ही रहूं, ये मेरा अंदाज़ है।
-रमेश मेंदीरत्ता
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2 घंटे पहले

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