आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

मन के रावण को कब दफनाओगे

                
                                                         
                            मन के रावण को कब दफनाओगे
                                                                 
                            
----------------------------
रे मनुष्य
अपने मन के रावण को
कब दफनाओगे
कागज के पुतले को फूंक
क्या सच में बुराइयों के आतंक से मुक्त हो पाओगे
झूठा ये त्योहार मना के
अपने आप से छल कर
जाओगे
सच मन के रावण को
कब दफनाओगे
जब तक जिंदा है रावण
तमाशा खूब होता रहेगा
आतंकों के स्वर में भारत मेरा
जलता रहेगा
रावण सदृश मन के विकारों से मुक्त होकर
राम बनकर दिखाओगे
क्रोध, छल ,कपट,कलह,द्वेष
अनाचार,अत्याचार से अपने को मुक्त कर जाओगे
बुराई पर अच्छाई का उदाहरण बनकर सामने आओगे तब ही सच्चे अर्थों में
पावन दशहरा का त्योहार मना पाओगे।

रेनू शर्मा, जयपुर
8 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर