आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

तेरी साँसो की तपिश से

TERI SANSO KI TAPISH SE
                
                                                         
                            तेरी साँसो की तपिश से
                                                                 
                            
ढल गया तस्सवुर मेरा
तेरे तस्सवुर में ढल जाऊँ
अब इरादा यही है मेरा।

तू पास आ या कि दूर जा
मुझे कुछ फ़र्क नहीं है।
तेरे साये से मैं लिपट जाऊँ
अब इरादा यही है मेरा।

तू जी ले जिंदगी अपनी
बता , मैनें तुझे कब रोका।
तेरे नाम से मैं जी लूँ
अब इरादा यही है मेरा।

तू चाहें मुझे या ना चाहें
मेरी उल्फ़त कम ना होगी।
जिंदगी सा तुझकों चाहना
अब इरादा यही है मेरा।

ज़माने को कुछ पता चले ना
मैं कोशिशें करुँगी।
मेरी कोशिशें रंग लाए
अब इरादा यही है मेरा।

तू भला था भला ही रहेगा
वादा रहा ये तुझ से
सारे इल्ज़ाम सर अपने लूँ
अब इरादा यही है मेरा।

रीटा भूषण मंगला

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें। 
 
8 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर