मुझको ग़लत, खुद को सही रहने दे,
कुछ बातों को तू अनकही रहने दे,
सोचता हूँ हर बार, के कह दूँ तुझसे,
दिल ये मगर कहता है, नहीं, रहने दे,
सवाल-ए-वस्ल पर बस तू मुस्कुरा दे,
कोई दिलासा मेरे दिल में, कहीं रहने दे,
सजाऊँ किसके लिए अपने आशियाने को,
जो बिखरा हुआ है उसे, वहीं रहने दे,
क्यूँ देना है "गुल", नाम कोई इस रिश्ते को,
हर कोई जो समझता है, वही रहने दे,
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