आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

खुद को सही रहने दे

                
                                                         
                            मुझको ग़लत, खुद को सही रहने दे,
                                                                 
                            
कुछ बातों को तू अनकही रहने दे,

सोचता हूँ हर बार, के कह दूँ तुझसे,
दिल ये मगर कहता है, नहीं, रहने दे,

सवाल-ए-वस्ल पर बस तू मुस्कुरा दे,
कोई दिलासा मेरे दिल में, कहीं रहने दे,

सजाऊँ किसके लिए अपने आशियाने को,
जो बिखरा हुआ है उसे, वहीं रहने दे,

क्यूँ देना है "गुल", नाम कोई इस रिश्ते को,
हर कोई जो समझता है, वही रहने दे,

 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
8 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर