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चाय

                
                                                         
                            सुनो,
                                                                 
                            
याद है तुम्हें वो कुल्हड़
जिसमें हम दोनों ने
पहली दफ़ा चाय पी थी
अभी तक उस कुल्हड़ की खुशबू
से कमरा महकता है।

और वो बिस्किट का रैपर जिसे तुमने
अपने हाथों से खोला था
उसमें बचा हुआ एक बिस्किट आज
भी तुम्हारा इंतजार कर रहा है।

आ जाओ चाय पीते हैं
उसी कुल्हड़ में
बचे हुए बिस्किट को डुबोते हुये
जैसे हम डूब जाते हैं तुम्हारे दीदार में।




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7 वर्ष पहले

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