यहां, हर हिंदुस्तानी, आपस में यारी यारी है।
हमारी भाषा हिंदी, हमें जान से प्यारी है।।
बेशक, हो गए हैं अंग्रेज हम, और, हो गए हैं बहुभाषी।
फिर भी, गर्व से कहते हैं, हम हैं भारत, हिंद के वासी।।
हर मां बाप ने, अपने खून से, अपना बच्चा सींचा है ।
फिर ना जाने, उनका बच्चा, हिंदी में क्यों, इतना कच्चा है।।
वो संस्कृति भी, कहां गई, जो हमारे गुरुजनों ने, हमें हैं सिखाएं।
उस भाषा को, हर हाल में है सीखना, जो हमने, इस देश से हैं पाए।।
ऐसा, क्या कमी रह गया, माता-पिता, गुरुजनों के परवरिश में।
बच्चा स्कूल जाता था, हिंदी सीखने को, भीगकर वो बारिश में।।
हर एक विदेशी, प्रभावित होते हैं, हर एक हिंदुस्तानी से।
क्योंकि हर हिंदुस्तानी ने, दिल जीता है, अपनी मीठी हिंदी जुबानी से।।
मैं उन गुरुओं, को शीश झुकाकर, तहे दिल से नमन, हूं करता।
जिनकी दी हुई शिक्षा से, आपके सामने, अपने शब्दों को, मैं हूं बोल पाता।।
विश्व की इस पावन धरती पर, नारी को, लक्ष्मी-सरस्वती की, दर्जा दी है जाती।
इसलिए नवजात शिशु के मुख से, पहली हिंदी बोल 'मां' बोली है जाती।।
आज और अभी से, मैंने मन में, बस यही है ठानी।
हमारी हिंदी भाषा को, जन-जन तक है फैलानी।।
यहां, जग की जननी, सब पर है भारी।
हमारी भाषा हिंदी, हमें जान से, है प्यारी।।
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