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हमारी मुलाकात कभी हो पाएगी ?

                
                                                         
                            मुझको तुम्हारी हर एक बात पसंद है
                                                                 
                            
खासकर तुम्हारी आवाज पसंद है
जब तुम पहनती हो साड़ी
और संवारती हो अपनी जुल्फे
मुझको तुम्हारी वो अदाएं पसंद है

तुम्हारा वो चांद सा चेहरा
वो झील सी आंखें
कानों का वो झुमका
होठों की वो मुस्कान
और हाथों की चूड़ियां

यहां तक मुझको तुम्हारा नाराज होना भी पसंद है

पर यह पसंद क्या पसंद ही रह जाएगी ?
तुमसे मिलने की आस में जिंदगी गुजर जाएगी

बस दिल को यही तसल्ली देता रहता हूं
शायद हमारी मुलाकात कभी हो पाएगी।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 घंटे पहले

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