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वक्त मेरा सिकंदर है आजकल

                
                                                         
                            उनकी बातें दिल में उतरती हैं मगर,
                                                                 
                            
कहने को किसके पास फ़ुर्सत है आजकल।

उनकी आहट की प्रतीक्षा है अभी,
दिल को बस इतनी ही आदत है आजकल।

एक मुलाक़ात को तरसते हैं हम,
दूरियों की भी तो कीमत है आजकल।

उनका चेहरा सामने हो या ख़्वाब में,
हर तरफ़ उनकी ही आहट है आजकल।

नाम उनका लेते ही ठहरती है नज़र,
उलफ़त में कैसी ये हालत है आजकल।

वक़्त ही मेरा सिकंदर है आजकल,
हर ज़ख़्म का वही रहबर है आजकल।

जो लोग कल मुझे गिराने में लगे थे,
उनकी नज़र में मैं बेहतर हूँ आजकल।

मैंने तो हारना कभी सीखा ही नहीं,
मुश्किल में मेरा हमसफ़र है आजकल।

कल तक जो मुझको कमतर समझते थे,
उनके लिए मैं एक ख़बर हूँ आजकल।

तूफ़ानों से कह दो ज़रा संभलकर चलें,
सीने में मेरे भी समंदर है आजकल।

मंज़िल की चाहत अभी बाकी है मगर,
रास्तों पर मेरा ही असर है आजकल।

मैंने बदल दिया है हालात का मिज़ाज,
मेरी ख़ामोशी भी मुख़्तसर है आजकल।

जो था कभी ख़्वाब, वही सामने खड़ा है,
शायद यही मेहनत का हुनर है आजकल।
-रतन कुमार कैथवास
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एक घंटा पहले

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