आँखें मूँद अँधेरों में बैठूँ,
सूरज ओझल हो जाएगा क्या?
बिल्ली के भाग्य से छींका टूट पाएगा क्या?
समंदर नदी में मिले तो खारा रह पाएगा क्या?
भूखे को उपदेश सुनाने से,
उसका पेट भर जाएगा क्या?
सूखी धरती पर गीत सुनाने से,
खेतों में अन्न उग जाएगा क्या?
ज़ख़्मों पर पर्दा डालने से,
दर्द कम हो जाएगा क्या?
झूठ को सच बताने भर से,
इतिहास बदल जाएगा क्या?
न्याय की मूरत पूजने से,
अन्याय ख़त्म हो जाएगा क्या?
हाथों में दीपक लेकर घूमूँ,
मन का तम मिट जाएगा क्या?
कर्म किए बिन केवल जपने से,
हर सपना पूरा हो जाएगा क्या?
बीज बिना धरती पर बोए,
फूलों-फसलों का मौसम आएगा क्या?
जो हक़ छीना है निर्बल का,
वह दान से लौटाया जाएगा क्या?
इंसान को ठुकराकर कोई,
ईश्वर को पा पाएगा क्या?
सच से नज़र चुराने भर से,
सच ओझल हो जाएगा क्या?
प्रश्नों को ख़ामोश कराने से,
उत्तर सो जायेगा क्या?
आखिर में कुछ अच्छा करने से ही
जग में सकारात्मक बदलाव आएगा |
क्या समझे… क्या जल्दी में हो?
हाँ… हाँ…
लगता है…, सब समझ गये |
-रतन कुमार कैथवास
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