शब्दों पर नहीं इरादों पर गौर कीजिए,
रहमत इतनी की हर हिज्जों पर गौर कीजिए।
चेहरों की चमक अक्सर धोखा भी दे जाती,
दिल साफ़ है या नहीं…. धड़कनों पर गौर कीजिए।
मस्जिद भी है, मंदिर भी, मगर बात और है,
झुकता है कहाँ सिर…. उन सज्दों पर गौर कीजिए।
इल्ज़ाम यूँ ही बाँट देना आसान बहुत है,
सच बोल रही हैं जो…. उन आँखों पर गौर कीजिए।
तूफ़ान से डरकर जो किनारों पे ठहर गए,
दरिया थे कभी वो…. उन लहरों पर गौर कीजिए।
रिश्ते भी किताबों से नहीं चलते ज़माने में,
कौन साथ खड़ा है…. उन कंधों पर गौर कीजिए।
हँस कर जो तेरी जड़ें काटे, समझ उसे तू तूफ़ान समझ,
जो डाँट के भीतर आग जले…. वही छुपा वरदान समझ।
फूलों से योद्धा नहीं गढ़े, ना छाँव वीर तैयार करे,
चोटों की छैनी चलती है तब, भाग्य स्वयं तलवार गढ़े।
मीठे स्वर अक्सर ज़हर मिले, इतिहास यही दोहराता है,
जो कड़वा सच सीने पे लगे, वही योद्धा जग पाता है।
तू पारस बन…. अपमान पी जा, क्रोध नहीं संकल्प जगा,
जो तुझसे टकराने निकले, उसका भी भाग्य नया कर जा।
हर ताना अब रणभेरी है, हर ठोकर खुला चुनौती-पत्र,
जो गिरकर फिर उठ खड़ा हुआ…. वही लिखता अपना चरित्र।
मत रो हालातों की धूप में, मत छाँव की भीख माँग कभी,
सूरज भी झुकता उसी तरफ़…. जो जलना जाने आग अभी।
रगों में बिजली दौड़ पड़े, शब्दों में गर्जन जीवित हो,
रतन, तू आदमी मत रह अब केवल…. तू चलता हुआ संग्राम ही हो।
-रतन कुमार कैथवास
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