गंगा की धारा में बहता दिखा अनुराग,
तन में काशी की शांति, मन में प्रयाग।
संगम की लहरों ने ऐसा दिया अनुराग,
जीवन का हर पल बन गया प्रभु का राग।
माथे पर भस्म, हृदय में गंगा का पराग,
आँखों में काशी बसी, साँसों में प्रयाग।
गंगा की लहरों में सदियों का इतिहास,
काशी की गलियों में शिव का निवास।
प्रयाग के संगम में श्रद्धा का राग,
भारत की आत्मा का अद्भुत अनुराग।
तन में काशी की महिमा, मन में संगम का भाग,
हर कण में आस्था, हर पल में अनुराग।
गंगा का आँचल, शिव का आशीर्वाद,
प्रयाग की मिट्टी में मिलता आत्मा का संवाद।
-रतन कुमार कैथवास
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