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शाम ठहरती है

                
                                                         
                            तुम रूठो तो शाम ठहरती है,
                                                                 
                            
मुझको तुमको मनाना आता है।

तुम खफ़ा हो तो दिल ये कहता है,
आज फिर उलफत आज़माना है।

तुम निगाहें चुराकर बैठो तो,
मुझको हर राज़ पढ़ना आता है।

तुम कहो दूर रहो ज़रा मुझसे,
दिल को और पास आना आता है।

तुम्हारी नाराज़गी भी प्यारी है,
इसमें भी प्यार मुस्कुराता है।

तुमको ग़ुस्सा बहुत आता है,
मुझको उस पर भी प्यार आता है।
-रतन कुमार कैथवास
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एक घंटा पहले

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