जिसे तलाशते रहे, उम्र भर निगाहों में,
उसे करीब से देखा, तो वो वहाँ नहीं मिलता।
किसी को प्यार मिला, मगर वफ़ा कम मिली,
किसी को साथ मिला, मगर दिलरुबा नहीं मिलती।
किसी के पास हैं, दौलत के सारे मौसम भी,
मगर सुकून का, कोई सिलसिला नहीं मिलता।
हम अपनी प्यास लिए, उम्र भर भटकते रहे,
हर एक मोड़ पे, कोई कुआँ नहीं मिलता।
जो छोड़ आए थे पीछे, वही याद आता है,
मगर लौटने का, कोई रास्ता नहीं मिलता।
इसलिए ऐ दिल, अधूरेपन को भी स्वीकार कर,
हर ख्वाबों को, उसका पूरा जहान नहीं मिलता।
-रतन कुमार कैथवास
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