कोई कह दे कि हार मान ले अपनी कमी देखकर,
हम फिर जीत के सिवा कोई अंजाम होने नहीं देते।
जो मेरे दर्द को समझते हैं, मुझे रोने नहीं देते,
जो मेरी हार चाहते हैं, मुझे सोने नहीं देते।
कोई कह दे कि तेरी मंज़िल बहुत दूर है अभी,
हम फिर अपने क़दमों को कहीं रुकने नहीं देते।
मेरे अपनों की दुआएँ मुझे टूटने नहीं देतीं,
मेरे गैरों की बातें मुझे झुकने नहीं देतीं।
जब कोई कहता है कि तू जीत नहीं सकता,
हम फिर अपनी मेहनत में कोई कमी रहने नहीं देते।
मेरे अपने मेरे आँसू को मोती बना देते हैं,
मेरे गैर मेरी आग को शोला बना देते हैं।
कोई कह दे कि तेरी उड़ान मुमकिन नहीं,
हम फिर अपने हौसलों को आसमाँ छुआ देते हैं।
जो कहते हैं कि हार जा, उन्हें जवाब देना है,
अपनी मेहनत से हर ख़्वाब को अंजाम देना है।
मेरे अपने मुझे गिरकर सँभलना सिखाते हैं,
अब हर ठोकर को जीत का पैग़ाम देना है।
-रतन कुमार कैथवास
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