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मैं सिक्के की तरह, खनकता ही रहूँगा

                
                                                         
                            गिरूँगा तो भी अपने ही उसूलों पर रहूँगा,
                                                                 
                            
चाहे दुनिया की भीड़ में मुझे आज़माकर देख।

मेरी फ़ितरत के दो चेहरे नहीं होते,
हम जैसे लोग हर किसी के नहीं होते।

शर्त लगा ले तू मेरी वफ़ादारी का,
हम हालात के साथ बदलने वाले नहीं होते।

तुझे आज़माने का शौक़ है तो आज़मा ले,
मेरे किरदार को दुनिया के तराज़ू में तौला ले।

मैं सिक्के की तरह, खनकता ही रहूँगा,
मैं इधर भी वही हूँ, उधर भी वही रहूँगा।

मैं अपने उसूलों की ख़ुद निशानी बनता हूँ।
मुझे उछालकर मेरी क़ीमत मत आँकना,

मैं गिरकर भी उठूँ तो मिसाल बन जाता हूँ।
मेरी वफ़ा को किसी शर्त का मोहताज न कर,

मेरे किरदार को शक़ के हवाले आज न कर।
मैं जैसा तेरे सामने हूँ, वैसा ही दुनिया के सामने,

शर्त लगा ले ज़माने से, मुझे उछालकर देख,
मैं मिट्टी में भी गिरूँ, तो अपनी पहचान न बदल पाऊँ।
-रतन कुमार कैथवास
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एक घंटा पहले

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