हर गीत मधुर है जब तूने दे दी कोई तान,
तेरी आवाज़ छू जाए तो खिल उठे सुनसान।
क्या तूफ़ानों से संगीत चुराया, या सुबह से राग लिया,
या चाँदनी की चुप पलकों से कोई मधुर सा राग लिया।
तेरे साज़ की एक झंकार से मौसम बदलने लगे,
सूखे हुए पत्तों में भी फिर से गीत मचलने लगे।
कुछ साज़ बजा, मन कुछ खाली-खाली सा है,
तेरे बिना ये दिल जैसे कोई सूना प्याला सा है।
कोई धुन छेड़ कि साँसों में फिर से रवानी हो जाए,
कोई गीत सुना कि आँखों में फिर नई कहानी हो जाए।
बादल गरजें तो उसमें भी कोई सरगम भर देना,
हवा गुज़रे तो उसके संग अपना कोई पैग़ाम लिख देना।
तेरी तान में जाने कैसी जादूभरी मिठास है,
टूटी हुई धड़कनों को भी तुझसे मिलने की आस है।
आज फिर अपनी उँगलियों से साज़ को छेड़ ज़रा,
इस ख़ामोश दिल के आँगन में कोई नग़मा छोड़ ज़रा।
मन के कोरे काग़ज़ पर कोई गीत लिखना है,
बहुत सुन ली ख़ामोशी… अब कुछ संगीत सुनना है।
-रतन कुमार कैथवास
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