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कैसी हद कर दी

                
                                                         
                            साँस थमती रही तेरी राहों में,
                                                                 
                            
धड़कनों की पुकार की हद थी।

तूने पूछा भी नहीं हाल मेरा,
और ये मेरी वफ़ा की हद थी।

हमने हर दर्द मुस्कुरा के सहा,
ये भी शायद प्यार की हद थी।

तुझको खोकर भी तुझको चाहा है,
ये जुनूँ की बहार की हद थी।

एक उम्मीद थी कि तू आएगा,
बस उसी एक आस की हद थी।

ज़िंदगी खत्म हो गई लेकिन,
तेरे आने की आस की हद थी।
-रतन कुमार कैथवास
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एक घंटा पहले

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