आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

कभी बेवजह भी खुश हो जाना चाहिए

                
                                                         
                            कुछ रास्ते बिना मंज़िल के भी तय करने चाहिए,
                                                                 
                            
कुछ ख़्वाब बिना मतलब के भी देखने चाहिए।

हर काम का हिसाब ज़रूरी तो नहीं,
कुछ लम्हे बस सुकून के लिए जीने चाहिए।

कभी बेवजह मुस्कुराना भी चाहिए,
कभी ख़ुद से मिलने का बहाना भी चाहिए।

हर ख़ुशी की वजह ढूँढ़ते हैं लोग,
कभी बेवजह भी ख़ुश हो जाना चाहिए।

कभी बारिश में यूँ ही भीग जाना चाहिए,
कभी पुरानी यादों में भी खो जाना चाहिए।

ज़िंदगी सिर्फ़ ज़िम्मेदारियों का नाम नहीं,
कभी अपने मन के लिए भी जी लेना चाहिए।

न हर बात का जवाब, न हर सवाल का हिसाब हो,
कुछ पल ऐसे हों जहाँ बस दिल के पास दिल हो।

दुनिया की फ़िक्र तो उम्र भर लगी रहेगी,
कभी ख़ुद के लिए भी वक़्त बेहिसाब हो।

कुछ ख़र्च ख़ुशी पर, कुछ वक़्त आवारगी पर होना चाहिए,
ज़िंदगी में थोड़ा हिस्सा अपनी मर्ज़ी का भी होना चाहिए।

हर क़दम पर फ़ायदे का तराज़ू लेकर मत चलो,
कभी ऐसा काम भी करो, जिसमें बस मन का सुकून होना चाहिए।
-रतन कुमार कैथवास
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक घंटा पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर