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जीवन में सैलाब बहुत है

                
                                                         
                            जीवन में सैलाब बहुत है, आँखों में कुछ ख्वाब बहुत है,
                                                                 
                            
हँसते चेहरे के पीछे देखो, दिल में कई जवाब बहुत है।
समझ सको तो फिर ना कहना, हमको कोई आस नहीं,
सूखे होंठों से पूछो जाकर, अरमानों की प्यास बहुत है।

मंज़िल दूर सही लेकिन, चलने का जज़्बात बहुत है,
राह कठिन हो चाहे जितनी, दिल में अब भी बात बहुत है।
जिसको दुनिया पागल कहती, वो ही सपनों का रखवाला,
टूटे दिल में भी जीने का अब तक विश्वास बहुत है।

थोड़ा दर्द मिला है तो क्या, जीवन में एहसास बहुत है,
रात भले ही लंबी हो पर, सुबह होने की आस बहुत है।
तुम पढ़ लेना आँखों को मेरी, शब्दों में क्या रखा है,
खामोशी के हर अक्षर में, छुपा हुआ इतिहास बहुत है।
-रतन कुमार कैथवास
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6 घंटे पहले

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