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एक सही दिशा चाहिए

                
                                                         
                            सूरज की तपिश ही हमारी जिजीविषा है,
                                                                 
                            
जलते हुए मौसम में भी जीने की तमन्ना है।

आग ही लेकर हम कुछ कर पाने का दम भरते हैं,
अंगारों की राहों पर भी सीना तानकर चलते हैं।

धूप अगर तेज़ है तो हौसला भी कम नहीं होगा,
रास्ता कितना भी कठिन हो, कदम कभी थम नहीं होगा।

जिस आग ने तपाया है, वही हमें निखारेगी,
आज की ये तपिश ही कल की मंज़िल सँवारेगी।

हम राख नहीं हैं, राख से उठने का हुनर रखते हैं,
आँधियों के बीच भी जलने का जिगर रखते हैं।

लपटों से दोस्ती है, शोले हमारी पहचान हैं,
मुश्किलों से लड़ते रहना ही अपने अरमान हैं।

जो पसीना धूप में गिरता है, वही रंग लाएगा,
आज का संघर्ष ही कल नया सवेरा बनाएगा।

न छाँव की तलाश है, न आसान राह चाहिए,
बस अपने भीतर की आग को एक सही दिशा चाहिए।

सूरज ढले तो ढल जाए, जज़्बा मगर ढलता नहीं,
जिस दिल में जीने की लौ हो, वो कभी जलकर बुझता नहीं।

हमने तपिश को अपना साथी बनाया है इस सफ़र में,
आग साथ रखी है हमने… कुछ कर दिखाने के हुनर में।
-रतन कुमार कैथवास
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 घंटे पहले

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