नैन झुकते, नैन उठते, फिर ठहरते नैन पर,
प्रेम की सरगम बज उठती हृदय के गान में।
लब खामोश रहते मगर, बात होती नज़र से,
चाँदनी-सी रात ढलती, प्रेम के एहसास में।
लबों पर ख़ामोशियाँ हैं, दिल मगर बेचैन है,
धड़कनों की हर अदा में प्रेम का ही बैन है।
एक नज़र का फ़ासला भी अब सहा जाता नहीं,
कौन जाने क्या छिपा है इस मधुर मुस्कान में।
उँगलियों की थरथराहट, साँस की रफ़्तार में,
अनकही बातें सिमटती जा रही इज़हार में।
पास आकर भी तुम्हारा दूर रहना क्या कहे,
एक हलचल-सी मची है आज दिल के द्वार में।
चूड़ियों की खनखनाहट कुछ कहानी कह गई,
पलकों की झुकती लचक भी राज़ अपना कह गई।
लब रहे ख़ामोश, लेकिन आँख ने सब कह दिया,
प्रेम की भाषा निराली है नयन-संवाद में।
चाँदनी भी आज कुछ शरमा रही है रात में,
चाँदनी के साथ कोई बात है जज़्बात में।
तुम ज़रा नज़दीक आए, वक़्त ठहरता-सा लगा,
जैसे सदियाँ कट गई हों एक छोटी बात में।
ना कोई वादा किया, ना क़सम कोई उठाई,
फिर भी आँखों ने हज़ारों दास्तानें हैं सुनाई।
एक हल्की-सी हँसी ने दिल को ऐसा छू लिया,
जैसे वीराने में फिर से बहारें लौट आईं।
मौन अधरों पर सजी है प्रेम की मधुरिम कहानी,
नैन में सपने सजे हैं, दिल में उठती है रवानी।
कह न पाए जो ज़ुबाँ से, वो नज़र कहती रही,
दो दिलों की धड़कनों में पल रही है प्रेम की रवानी।
-रतन कुमार कैथवास
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