ज़िंदगी हर रोज़ नया सबक़ सिखाती है,
कभी हँसाती है हमको, कभी आज़माती है।
पानी पर तस्वीर कहाँ ठहर पाती है,
मेहनत के बिना तक़दीर कहाँ बन पाती है।
सिर्फ़ सोचने से, मंज़िल मिला नहीं करती,
बिना चले, कोई राह तय नहीं होती।
ख़्वाब आँखों में सजाने से, क्या हासिल होगा,
बिना जागे, कोई सुबह अपनी नहीं होती।
पसीने की स्याही से इतिहास लिखा जाता है,
ठोकरों से ही चलने का हुनर आता है।
जो वक़्त की आँखों में आँखें डालकर लड़ता है,
वही अपनी मेहनत से मुक़द्दर बदलता है
हवाओं के भरोसे चिराग़ जला नहीं करते,
इरादे कमज़ोर हों तो तूफ़ान थमा नहीं करते।
जिनके सीने में जुनून की आग जलती है,
उनके रास्ते मुश्किलों से डरा नहीं करते।
ख़्वाबों को हक़ीक़त में ढालना पड़ता है,
तक़दीर से पहले ख़ुद को बदलना पड़ता है।
ज़िंदगी भी उसी का साथ निभाती है,
जो गिरकर भी उठे, उसे मंज़िल मिल जाती है।
-रतन कुमार कैथवास
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