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सर्द रातें ये मध्यम मध्यम हवा के

                
                                                         
                            सर्द रातें ये मध्यम मध्यम हवा के.!
                                                                 
                            
झोंको से डालियों का लचकना यूं.!

दिल में दबे अनछुए एहसासों का मचलना यूं.!
आंखो का रातों में देर तलक जागना यूं.!

दिल की बेताबी का बढना बैचैन करना यूं.!
हवा के ये नर्म झोकें जैसे मुलायम हाथों का स्पर्श हो तुम्हारे यूं.!

मेरे तन को सहलाते मन बहलाते
अंतर्मन को लरजते यूं.!
तुम सामने हो यही मेहसूस करवाते यूं.!

छत पर लेटे हम चांद तारों से करते तुम्हारी बातें यूं.!
ऐसा लगता हैं जैसे तुम चांद बनके मुझे तकते यूं.!

बडे़ अरमानों से सजाया हैं आंगन हमनें यूं.!
रातरानी बनके खूशबू से बिखरते मुझमें यूं.!

सर्द रातें ये मध्यम मध्यम हवा के.!
झोंको से डालियों का लचकना यूं.!
-रश्मि रावत
 
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7 महीने पहले

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