हो भाव विह्वल रसधार प्रबल नयनों से अविरल,गंगा जमुना बहती है
हे भारत माँ क्यों रोती है।
लाल तेरा दुश्मन जबड़े से सकुशल घर आया है
लिये अंक में हर्षा कर के उसको गले लगाया है,
या गर्वित होकर झूम रही आँखों से झरते मोती है।
हे भारत.............
तेरा नंदन ये अभिनंदन मस्तक पर चंदन बन आया है,
दुश्मन की छाती पर चढ़कर आख तरेर कर आया है।
अब सजा थाल कर तिलक भाल क्यों ईर्ष्या तुझसे होती है।
हे भारत..................
यद्यपि मिग विमान था बूढ़ा पर एफ सोलह पर भारी था,
हे माता तेरे संस्कार और दूध का कर्ज उधारी था।
तेरी मन्नत पूजा अर्चन प्रार्थना अब फलीभूत हुयी
अब बड़े जोर की भूख लगी है समय व्यर्थ क्यों खोती है।
हे भारत ......।
डा. रश्मि कुलश्रेष्ठ
2-3-2019 समय-10-20
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