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मैं चार कदम नहीं, पूरी ज़िन्दगी तुम्हारे साथ बढ़ जाऊँगी...

                
                                                         
                            कहो साथ चलने को चार कदम और, तो हौसला बना कर रखूँगी....
                                                                 
                            
कहो साथ ज़िन्दगी के बिताने को दो पल और तो, हसीन सपने बुनूँगी....
तुम्हें पता है लगता नहीं मन मेरा कहीं और, तो तुम्हें हमेशा अपने मन से सजाऊँगी......
तुम्हें पता है सादगी तुमपे अच्छी नहीं लगती ,,, तो तुम मुझसे ही नाराज़गी जताओगे
कहो एक बार कि तुम मेरे हो, तो मैं सारी दुनिया से लड़ जाऊँगी...
कहो कि थक गए हो तुम, तो मैं तुम्हारी थकन में खो जाऊँगी...
तुम रूठो भी तो इतना ही, कि मना सकूँ तुम्हें,
तुम हँसो तो ऐसे, कि उसी हँसी में जी जाऊँगी...
तुम्हें पता है इश्क़ छुपाए नहीं छुपता,
फिर भी मैं हर दफा तुम्हें देख के नज़रें झुकाऊँगी...
तुम कहो तो मैं वक्त से भी लड़ जाऊँ,
तुम कहो तो मैं खुद को भी भूल जाऊँ...
मुझे भीड़ में भी सिर्फ तुम दिखते हो,
मैं इस दिल का हर रास्ता तुम तक ले जाऊँ...
तुम साथ हो तो ये सफर मुकम्मल है,
तुम ना हो तो मैं खुद से ही उलझ जाऊँ...
अब तुम बोलो, एक कदम तुम बढ़ाओ,
मैं चार कदम नहीं, पूरी ज़िन्दगी तुम्हारे साथ बढ़ जाऊँगी...

 
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