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तथा कुकृत्यों को देखना पसंद नहीं है ।।

                
                                                         
                            जो कोई भी समाज का दर्पण ,
                                                                 
                            
बनने की कोशिश करता हैं ,
उस दर्पण को समाज तोड़ देता है ।
क्योंकि उसे अपनी ही कुरीतियों
तथा कुकृत्यों को देखना पसंद नहीं है ।।
-रंजीत कुमार महतो "गम्हरा"
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7 घंटे पहले

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