बड़ी सुंदर माइरी लाग़हय सज़नी रे ,
बड़ी सुंदर माइरी लाग़हय सज़नी रे ,
हाय मोर सज़नी गे , हाय मोर सज़नी गे
खोपवें गज़रा सोभय , खोपवें मेंजूरा सोभय
डंड़वें करधनी रे, हमर सज़नी के, हमर सज़नी के
हाथे सोभय चुरी शाखां, माथे सिंदुर रे
नाकें सोभय नथुनीं , सोभय पांवें पैंजनी रे ।
हमर सज़नी के , हमर सज़नी के
गोड़वें अऱता रांगी , हथवें मेहन्दी रे
हाय मोर सज़नी गे , हाय मोर सज़नी गे ।
सोलहों सिंगार करी आवय जब सज़नी रे ,
बड़ी सुंदर माइरी लाग़हय सज़नी रे
बड़ी सुंदर माइरी लाग़हय सज़नी रे ।।
- रंजीत कुमार महतो "गम्हरा"
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