कहलों न माने, आंचरा धरी टाने जमुना घाटे
कहलों न माने,आंचरा धरी टाने जमुना घाटे ।
शाखां - चुरी हो, सोभे फोरी देलई जमुना घाटे ,
शाखां - चुरी हो , सोभे फोरी देलई जमुना घाटे ।
दही - हांडी हो , सोभे फोरी देलई जमुना घाटे
दही - हांडी हो , सोभे फोरी देलई जमुना घाटे ।
कहलों न माने, आंचरा धरी टाने जमुना घाटे ,
शाखां - चुरी हो , सोभे फोरी देलई जमुना घाटे ।।
- रंजीत कुमार महतो "गम्हरा"
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X