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समय का खेल

                
                                                         
                            गुजरते वक्त के साथ, सब छूट गया
                                                                 
                            
सारे रिश्ते,नाते,एक पल में रूठ गया
सजाए रखे थे,जो सपने वर्षों से मैने
आज शीशे की तरह वह भी टूट गया।।

आवाज किसे दूं,किसे अपना समझूं
किसके दर पर जाऊं,किसे बात बताऊं
सब खुशी समय के साथ खत्म होती जा रही है
जिंदगी अब समय के साथ ढलती जा रही है।।

सब समय का खेल है,
कब,कहां,किस मोड पर धोखा दे जाता है,
हालात ऐसे कर देता है,जीना मुश्किल हो जाता है
अंत में इंसान फिर,शीशे जैसा टूट जाता है।।

हां वक्त सब खेल रचाता है
वक्त ही सब कराता है।
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8 महीने पहले

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