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भारतमाता हम तेरे संतान

                
                                                         
                            भारतमाता तेरे संतान है हम
                                                                 
                            
तेरी गोद में लेटे हर दुख से अंजान है हम।
लोरी सुनाती हो हमको सुलाती हो
करते है वंदन और करते गुणगान है हम।।

भारत माता तेरे संतान है हम.....

भारतमाता आश तुम्हारी न कभी टूटने देंगे
हिमालय से भी ऊंचा तिरंगा तुम्हारा न कभी झुकने देंगे।
तुम्हारी महिमा का करते रहते बखान है हम
भारतमाता तेरे संतान है हम।।

तू मत रो मां तेरे आंखों में आंसू न देख पाएंगे
जुर्म जितने झेला है तुमने सबका हिसाब लगाएंगे ।
रण पथ पर चलने वाले वीर नहीं तूफान है हम
भारतमाता तेरे संतान है हम।।

सबने तेरे जिस्म नोचे पैरों में भी बेड़ी ठोका है
सबको दिया आश्रय किसी को न तुमने रोका है।
इतने है दर्द सहे,इतने सहे तुमने गम
भारतमाता तेरे संतान है हम।।

मां तुम्हारे हर कर्ज को चुकाऊंगा
तुम्हारा दिया हर फ़र्ज़ को निभाऊंगा।
अगर आन,बान,शान पर लगी दाग तुम्हारे
कसम तुम्हारी मां शत्रुओं को वही मार गिराऊंगा ।।
-रणधीर कुमार वर्मा 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
10 महीने पहले

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