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तब फिर सोचो भला अपनी असफलता

                
                                                         
                            आओ एक साथ मिलकर वक्त के साथ मंजिल की ओर बढ़ा जाए,
                                                                 
                            
सफलता के लिए वक्त के सामने ही इस वक्त को वक्त पर पढ़ा जाए,
सचमुच जब हम सब मिलकर बदल सकते हैं बुरे वक्त को अच्छे वक्त में,
तब फिर सोचो भला अपनी असफलता के लिए वक्त पर दोष क्यों मढ़ा जाए |
-मनस्व
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23 घंटे पहले

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