धर्म की बातें भले ही कभी लगती हैं सीधी तो कभी लगती है घूमाते हुए गोल-गोल,
किंतु धर्म बाहरी प्रकृति और मनुष्य के अंत प्रकृति की परते धीरे-धीरे देता है खोल,
अतः विज्ञान को चाहिए कि अंधाधुन दौड़ में प्रकृति के साथ अनहित करने के बजाय,
संपूर्ण विकास हेतु धर्म के साथ मिलकर प्रकृति के साथ बढ़ाएं अपना मेलजोल|
-मनस्व
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