संपूर्ण विनाश का स्वप्न यह गढ़ता जाता है,
सिर के ऊपर भी बराबर यह चढ़ता जाता है,
सचमुच बिन सोचे और समझे क्रोधित मन,
अनाचार और पाप की ओर बढ़ता जाता है|
-मनस्व
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