खुश हूं, ये हंसीन शाम देखकर,
खुश हूं मैं तुम्हारे हाथों में जाम देख कर,
ये इश्क अब खासम खास ना रहा,
खुश हूं, मैं इसे होते हुए आम देखकर|
-मनस्व
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