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भगवान को कंधे पर उठाने के लिए

                
                                                         
                            क्या कहते हो?
                                                                 
                            
हार और जीत में क्या रखा है?
अरे मेरे भाई हार में गम और जीत में खुशी है |
सफर में कुछ नहीं है,
राही में भी कुछ नहीं है,
और रास्ते में भी कुछ नहीं है,
यकीनन मंजिल में भी कुछ नहीं है|
घड़ी के 2:00 बजे हैं,
कुछ लोग अपने मोबाइल स्क्रीन से,
तो कुछ लोग टीवी की स्क्रीन से चिपके हुए हैं|
ट्रांजिस्टर के वॉल्यूम तेज है,
बाजार बंद तो नहीं है किंतु माहौल पूरी तरह बंद के जैसा ही है,
सभी लोग अपने जरूरी,
गैरजरूरी काम को निपटा चुके हैं|
भारत और श्रीलंका के बीच हो रहे मैच में,
भारत को जीताने के लिए,
तिरंगा झंडाआसमान में लहराने के लिए,
और क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर को,
अपने कंधे पर उठाने के लिए|
-मनस्व
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3 घंटे पहले

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