आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   kartavyapath
kartavyapath

मेरे अल्फाज़

कर्तव्य पथ

rameshwar Mishra

64 कविताएं

69 Views
मत हट पथ से,
कर्मक्षेत्र रण से,
कौन कहा तू हारेगा,
तू जीतेगा अपने,
प्रण और पौरुष से

देख कभी तू
उस पेड़ को
जिसे काटा गया
न जाने कितनी बार
अब जरा देखो
ढीठपन उसका
नई कोपलें निकली
हैं हजार

बनकर शाखाएं
आगे, ऊपर ही,
उठ रही है
न डर रही हैं
न झुक रही है
सीख, तू भी
मत हार

सुना नहीं क्या तूने
कर्म करने वालों
की ही होती हैं
जय जयकार

-रामेश्वर शर्मा

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
सर्वाधिक पढ़े गए
Top
Your Story has been saved!