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प्यारी गौरैया

                
                                                         
                            प्यारी गौरैया
                                                                 
                            

आँगन में चीं-चीं करती थी,
मेरे जी में मिश्री भरती थी।
कभी जाती थी मुंडेरों पर ,
तो आती कभी झरोखों पर ।
तेरी गाथा गाती मैया,
कहाँ चली गयी गौरैया।।

तेरे चीं-चीं आवाजों का शोर,
कौन ले गया तुमको चोर ।
फिर मेरे आँगन में आना,
दूँगा तुमको पानी दाना ।
साथ में होगा मेरा भैया,
कहाँ चली गयी गौरैया ।।

माँफ करो मेरी गलती तुम,
आओ मेरे साथ चलो तुम ।
छत पर दाना- पानी रख दूँगा,
कोई गलती नहीं करूंगा ।
ले रही शपथ मेरी मैया,
कहाँ चली गयी गौरैया ।।

हिमांशु व प्रिया, सैंट मैरिज स्कूल, ज़मानियाँ, गाज़ीपुर




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7 वर्ष पहले

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