पुरानी पेंशन
नई नवेली कैसे ले ले उसमें है परेशानी,
पूरे देश में सब कहते हैं पेंशन सही पुरानी ।
नई में न जाने क्या हुनर होगा,
कम से कम पुरानी तो अपने मूल को नही भूलेगा।
नौकी का कर बैठेगी भगवान भी ना ओके माने,
पुरानी को तो हम अपनी आँखी से देखे व जाने।
बड़े नेताजी कुछ ना बोले चुप्पी बिल्कुल साधे,
ऐसा क्या है भैया इसमें मुँह को क्यों हो बांधे।
सब नेताजी एकजुट होकर है कहते अब आयी है असली,
तो क्यों नहीं नेताजी नेताजी इसको कर लेते अदला -बदली।
"रमेश सिंह यादव"
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