तेवरी-
हर किसी भूचाल में जि़न्दा रहे
प्यार खुशबू की तरह हर हाल में जि़न्दा रहे।
मगरमच्छों से लड़ेगी एक दिन
एक मछली ही सही पर ताल में जि़न्दा रहे।
जो खुशी है टिटिमाते दीप-सी
अब अगर ब्याही गयी, ससुराल में जि़न्दा रहे।
चाबुकों की मार के हम बीच हैं
अश्व जैसे पाँव अपने नाल में जि़न्दा रहे।
मेघ बनकर इसलिए हम आ गये
फूल में रँग औ’ हरापन डाल में जि़न्दा रहे।
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