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प्रेम है पूजा कविता

                
                                                         
                            प्रेम है पूजा
                                                                 
                            
प्रेम है पूजा
हर प्रेमी का
प्रेम है पूजा।

यही है अर्पण
यही समर्पण
यही है अर्पण
यही समर्पण
यहाॅं नहीं कुछ और दूजा
प्रेम है पूजा
प्रेम है पूजा
हर प्रेमी का
प्रेम है पूजा।

पल पल हर पल
क्षण क्षण भर क्षण
पल पल हर पल
क्षण क्षण भर क्षण
दुनिया का है एक अजूबा
प्रेम है पूजा
प्रेम है पूजा
हर प्रेमी का
प्रेम है पूजा।

प्रेम में को हारा भी है
प्रेम में कोई जीता भी है
प्रेम में को हारा भी है
प्रेम में कोई जीता भी है
कोई रूठा कोई रीझा
प्रेम है पूजा
प्रेम है पूजा
हर प्रेमी का
प्रेम है पूजा।

आशा भी है
अभिलाषा भी
दिल की अपनी
है भाषा भी
आशा भी है
अभिलाषा भी
दिल की अपनी
है भाषा भी
प्रेम में अक्सर हर कोई डूबा
प्रेम है पूजा
प्रेम है पूजा
हर प्रेमी का
प्रेम है पूजा।
-रामवृक्ष बहादुरपुरी
 
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17 minutes ago

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